यह पूजन क्यों आवश्यक है
- विवाह में बार-बार देरी या रिश्ता टूटना
- कुंडली में सप्तम भाव कमज़ोर होना
- गुण मिलान में बार-बार समस्या
लाभ
- विवाह में आ रही रुकावट दूर होना
- सही रिश्ता मिलने की संभावना
- दांपत्य जीवन में सद्भाव
विवाह संबंधी पूजा
विवाह बाधा निवारण
जब कुंडली के सप्तम भाव (विवाह-भाव) में पाप-ग्रह का प्रभाव हो या उस भाव का स्वामी कमज़ोर हो, तो विवाह में बार-बार देरी, रिश्ता टूटना या गलत रिश्तों का आना देखा जाता है।
जब कुंडली विश्लेषण में विवाह-बाधा की पुष्टि हो, तब इस पूजा से सप्तम भाव की शांति एवं शुभ ग्रह-योग बनाने की कोशिश की जाती है।
सप्तम भाव शांति मंत्र जाप, हवन एवं संबंधित ग्रह-शांति विधि इस पूजा का हिस्सा है। संकल्प यजमान के नाम-गोत्र में लिया जाता है।
शुक्र एवं गुरु ग्रह शांति मंत्र, साथ में विवाह-बाधा निवारण स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
कुंडली देखकर शुभ तिथि तय की जाती है — शुक्रवार या गुरु-पुष्य योग इस पूजा के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं।
नहीं, दोनों के लिए समान विधि होती है — संकल्प उस व्यक्ति के नाम-गोत्र में लिया जाता है जिसके लिए पूजा हो रही है।
पूजन बुकिंग
नीचे अपना विवरण भरें। एक कार्य दिवस के भीतर उपयुक्त मुहूर्त, सामग्री सूची एवं लिखित दक्षिणा के साथ उत्तर मिलेगा।