यह पूजन क्यों आवश्यक है
- साढ़ेसाती या ढैय्या का दौर चल रहा हो
- बार-बार समस्याएं एवं देरी
- शनि-संबंधी मानसिक दबाव
लाभ
- शनि-बाधा में कमी
- मानसिक स्थिरता
- कार्यों में प्रगति
शनि संबंधी पूजा
शनि शांति
जब शनि ग्रह चंद्र राशि से बारहवीं, पहली एवं दूसरी राशि में गोचर करता है, तो यह समय साढ़ेसाती कहलाता है — जो लगभग साढ़े सात वर्ष तक चलता है।
इस दौर में कार्य में देरी, मानसिक दबाव या बार-बार परीक्षा जैसी परिस्थितियां आ सकती हैं — लेकिन हर साढ़ेसाती अशुभ नहीं होती, इसका प्रभाव व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करता है।
जब साढ़ेसाती का प्रभाव प्रतिकूल महसूस हो रहा हो, तब शनि शांति पूजा से राहत पाने की कोशिश की जाती है।
शनि मंत्र जाप, शनि तैलाभिषेक एवं हवन इस पूजा का हिस्सा हैं। संकल्प के बाद शनि देव की विशेष आराधना की जाती है।
शनि बीज मंत्र एवं दशरथ-कृत शनि स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
शनिवार के दिन यह पूजा विशेष शुभ मानी जाती है, खासकर साढ़ेसाती के आरंभ में।
नहीं, इसका प्रभाव कुंडली के अनुसार अलग होता है — कई बार यह अनुशासन एवं मेहनत का फल देने वाला समय भी होता है। हम कुंडली देखकर सही सलाह देते हैं।
पूजन बुकिंग
नीचे अपना विवरण भरें। एक कार्य दिवस के भीतर उपयुक्त मुहूर्त, सामग्री सूची एवं लिखित दक्षिणा के साथ उत्तर मिलेगा।