यह पूजन क्यों आवश्यक है
- काम में बार-बार रुकावट
- मानसिक अशांति
- राहु-केतु की महादशा/अंतर्दशा
लाभ
- रुके हुए कार्यों में प्रगति
- मानसिक शांति एवं निर्णय-शक्ति में सुधार
- राहु-केतु के अशुभ प्रभाव में कमी
दोष निवारण पूजा
काल सर्प दोष
जब कुंडली के सारे ग्रह राहु एवं केतु के बीच एक ही तरफ स्थित होते हैं, तो काल सर्प दोष बनता है। इसके बारह (12) प्रकार माने गए हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि राहु-केतु किस भाव में स्थित हैं।
अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर एवं शेषनाग — ये बारह प्रकार हैं। हर प्रकार का जीवन पर प्रभाव अलग होता है, इसलिए सही प्रकार जानना ज़रूरी है।
जब इस दोष के कारण कार्य में बार-बार रुकावट, मानसिक अशांति या अनावश्यक देरी महसूस हो रही हो, तब निवारण पूजन की सलाह दी जाती है।
नाग-नागिन का पूजन एवं विसर्जन, रुद्राभिषेक, एवं राहु-केतु शांति हवन इस पूजन का मुख्य हिस्सा है। यह विधि पंचमी या नाग तिथि पर संपन्न की जाती है।
राहु एवं केतु बीज मंत्र के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है।
नाग पंचमी के आस-पास की तिथियों पर यह पूजन विशेष शुभ मानी जाती है। सही तिथि कुंडली देखकर तय की जाती है।
नहीं, इसकी तीव्रता प्रकार एवं अन्य ग्रह योगों पर निर्भर करती है। कई बार यह दोष जीवन में किसी खास क्षेत्र में ही असर दिखाता है। कुंडली देखने के बाद ही सही सलाह दी जाती है।
एक दिन का पूजन 3-5 घंटे का होता है, लेकिन अगर संपूर्ण अनुष्ठान हो तो कई दिनों तक चल सकता है।
पूजन बुकिंग
नीचे अपना विवरण भरें। एक कार्य दिवस के भीतर उपयुक्त मुहूर्त, सामग्री सूची एवं लिखित दक्षिणा के साथ उत्तर मिलेगा।