यह पूजन क्यों आवश्यक है
- परिवार में बार-बार रुकावट या असफलता
- संतान-संबंधी समस्याएं
- अचानक धन-हानि या स्वास्थ्य समस्या
लाभ
- पूर्वजों का आशीर्वाद
- पारिवारिक शांति
- रुकावटों में कमी
पितृ शांति एवं पितृ दोष
पितृ दोष निवारण
कुंडली में जब सूर्य, राहु या शनि जैसे ग्रह नवम भाव (पितृ स्थान) को प्रभावित करते हैं, तो पितृ दोष बनता है। यह दोष पूर्वजों की अतृप्ति से जुड़ा माना जाता है, जिसका असर संतान-सुख, धन-लाभ एवं परिवार की शांति पर पड़ सकता है।
पारिवारिक कलह, संतान-प्राप्ति में देरी, कार्य में बार-बार रुकावट, या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जो बिना स्पष्ट कारण के बनी रहें — ये पितृ दोष के संभावित संकेत हो सकते हैं।
जब कुंडली विश्लेषण में पितृ दोष की पुष्टि हो, तब पितृ शांति पूजा से पूर्वजों को तृप्त करने एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कोशिश की जाती है।
पितृ तर्पण, पिंड दान एवं पितृ शांति मंत्र जाप इस पूजा का मुख्य हिस्सा हैं। संकल्प यजमान के नाम-गोत्र में लिया जाता है, उसके बाद तर्पण एवं हवन संपन्न किया जाता है।
पितृ पक्ष, अमावस्या या सर्वपितृ अमावस्या जैसी तिथियों पर यह पूजा विशेष शुभ मानी जाती है।
नहीं, इसकी तीव्रता कुंडली देखकर ही तय होती है। सबको यह पूजा ज़रूरी नहीं होती — हम पहले सही मूल्यांकन करते हैं।
हाँ, संकल्प आपके नाम-गोत्र में लिया जाता है एवं आप लाइव वीडियो के माध्यम से जुड़ सकते हैं।
पूजन बुकिंग
नीचे अपना विवरण भरें। एक कार्य दिवस के भीतर उपयुक्त मुहूर्त, सामग्री सूची एवं लिखित दक्षिणा के साथ उत्तर मिलेगा।