बगलामुखी पूजन क्या है?
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें स्तंभन शक्ति की देवी माना जाता है। यह पूजा उन लोगों के लिए की जाती है जो कोर्ट केस, संपत्ति विवाद, व्यापार में विरोध, झूठे आरोप, कानूनी नोटिस या शत्रुता से गुजर रहे होते हैं। बगलामुखी पूजा को निर्णय-शक्ति, कानूनी सुरक्षा और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा का शक्तिशाली अनुष्ठान माना जाता है।
बगलामुखी पूजन क्यों करनी चाहिए?
कुंडली में शत्रु भाव (छठा घर) कमजोर हो, या कानूनी/सरकारी मामले में बार-बार रुकावटें आ रही हों, तो ज्योतिष शास्त्र में बगलामुखी अनुष्ठान की सलाह दी जाती है। यह पूजा मन की स्थिरता, आत्मविश्वास और विरोधियों पर विजय दिलाने में सहायक मानी जाती है।
पूजन विधि
पूजन एक निर्धारित मुहूर्त पर शुरू होती है। सबसे पहले संकल्प लिया जाता है — यजमान का नाम, गोत्र और उद्देश्य। उसके बाद बगलामुखी यंत्र की स्थापना, पंचोपचार पूजा, मंत्र जाप और हवन किया जाता है। अनुष्ठान की अवधि (जाप की गणना) चार्ट देखकर तय होती है — कुछ लोग एक दिन का पूजन करते हैं, जबकि पूर्ण अनुष्ठान कई दिनों तक चलता है।
मंत्र एवं जाप
बगलामुखी मूल मंत्र का जाप निर्धारित संख्या में किया जाता है, साथ में हवन के दौरान आहुति दी जाती है। मंत्र जाप गुरु-परंपरा के अनुसार, शुद्धता और नियम के साथ किया जाता है।
पूजन सामग्री
- पीली वस्तु — हल्दी, चने की दाल, पीला वस्त्र
- बगलामुखी यंत्र
- हवन सामग्री एवं समिधा
- एकाक्षी नारियल (जहाँ शास्त्र-अनुसार उपयुक्त हो)
पूजन के लाभ
- कोर्ट केस एवं कानूनी विवादों में सहायता
- विरोधियों एवं नकारात्मक शक्ति से सुरक्षा
- व्यापार में आ रही रुकावटों में कमी
- मानसिक स्थिरता एवं आत्मविश्वास
पूजन कब एवं कहाँ करनी चाहिए?
बगलामुखी पूजन के लिए तिथि एवं मुहूर्त कुंडली देखने के बाद तय किया जाता है। यह पूजा मंदिर/निर्धारित स्थान पर विधि-विधान से संपन्न होती है — आप लाइव वीडियो के माध्यम से पूजा में शामिल हो सकते हैं, चाहे आप कहीं भी हों।