यह पूजन क्यों आवश्यक है
- विवाह में देरी या बाधा
- दांपत्य जीवन में बार-बार अनबन
- मंगली मिलान में समस्या
लाभ
- विवाह में आ रही रुकावटों में कमी
- दांपत्य जीवन में सद्भाव
- मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव में कमी
दोष निवारण पूजा
मंगल दोष निवारण
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तो इसे मंगल दोष (मांगलिक दोष) कहा जाता है। विवाह के संदर्भ में इसकी चर्चा सबसे ज़्यादा होती है, क्योंकि यह दांपत्य जीवन में अनबन या विवाह में देरी का कारण माना जाता है।
मंगल दोष की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि मंगल किस भाव में बैठा है, किस राशि में है, एवं कौन से ग्रह उसे देख रहे हैं। कई बार मंगल दोष "cancel" भी हो जाता है अगर कुछ विशेष योग बने हों — इसलिए पूर्ण कुंडली विश्लेषण ज़रूरी है, सिर्फ एक भाव देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
जहाँ मंगल दोष वास्तव में प्रभावी हो एवं cancellation योग न बनता हो, वहाँ मंगल दोष पूजन की सलाह दी जाती है — खासकर विवाह तय करने से पहले या दांपत्य जीवन में बार-बार अनबन होने पर।
मंगलनाथ जैसे मंगल-ग्रह से संबंधित स्थान पर भात पूजा एवं मंगल शांति हवन किया जाता है। संकल्प के बाद मंगल ग्रह की शांति के लिए मंत्र जाप एवं हवन होता है।
मंगल बीज मंत्र का जाप निर्धारित संख्या में किया जाता है, साथ में हवन में लाल वस्तु की आहुति दी जाती है।
मंगलवार के दिन यह पूजन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सही तिथि एवं मुहूर्त कुंडली देखने के बाद तय किया जाता है।
नहीं। पहले कुंडली देख कर यह पुष्टि की जाती है कि दोष वास्तव में प्रभावी है या cancellation योग से शांत हो चुका है। हम वही सलाह देते हैं जो आपकी चार्ट में genuinely ज़रूरी हो।
ज़्यादातर लोग विवाह से पहले करवाते हैं, लेकिन विवाह के बाद भी दांपत्य अनबन के लिए यह पूजन की जाती है।
पूजन बुकिंग
नीचे अपना विवरण भरें। एक कार्य दिवस के भीतर उपयुक्त मुहूर्त, सामग्री सूची एवं लिखित दक्षिणा के साथ उत्तर मिलेगा।